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बेंटिंक स्ट्रीट की संपत्ति के नाम पर 2 करोड़ की रंगदारी
कोलकाता। महानगर के हृदय स्थल बेंटिंक स्ट्रीट स्थित एक बहुमूल्य संपत्ति को केंद्र बनाकर रची गई धोखाधड़ी और रंगदारी की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस की विशेष टीम ने करीब दो करोड़ रुपये की ठगी और जाली दस्तावेजों के आधार पर जालसाजी करने के आरोप में मुख्य आरोपी विष्णु कुमार अग्रवाल को साल्टलेक इलाके से गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई बउबाजार थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गई है। पुलिस अब इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में छापेमारी कर रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला 65, बेंटिंक स्ट्रीट स्थित एक संपत्ति के डेवलपमेंट एग्रीमेंट और पावर ऑफ अटॉर्नी से शुरू हुआ। आरोपियों ने सोची-समझी साजिश के तहत पहले शिकायतकर्ता को विश्वास में लिया। भरोसे में आकर शिकायतकर्ता ने किरायेदारों के पुनर्वास और केएमसी से विभिन्न स्वीकृतियां प्राप्त करने में करीब 35 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च कर दी। इसके बाद, आरोपियों ने अपनी हिस्सेदारी हस्तांतरित करने का झांसा देकर शिकायतकर्ता के एक सहयोगी को करीब 2 करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए कहा। सुरक्षा के तौर पर जो मालिकाना हक के दस्तावेज सौंपे गए, वे बाद में जांच के दौरान जाली पाए गए। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक बार बड़ी रकम हाथ में आने के बाद आरोपियों का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। उन्होंने निर्माण स्थल पर बाधाएं खड़ी करना शुरू कर दिया और कथित तौर पर कार्य सुचारू रूप से चलाने के लिए अतिरिक्त 2 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी। विवाद बढऩे पर मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, लेकिन वहां भी समझौता विफल रहा। इसके बाद आरोपियों ने एकतरफा निर्णय लेते हुए डेवलपमेंट एग्रीमेंट को ही रद्द कर दिया। पुलिस जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने जिस पते पर अपना कार्यालय बताया था, वहां वास्तव में कोई ऑफिस अस्तित्व में ही नहीं था।
जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी विष्णु कुमार अग्रवाल पूर्व में भी इसी तरह की अपराधित गतिविधियोंके जरिये अन्य रियल एस्टेट कंपनियों को अपना शिकार बना चुका है। पुलिस को ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिनसे पता चला है कि एम/एस एस.पी. कॉन्क्लेव प्राइवेट लिमिटेड और एम/एस एश्योर रियल्कॉन एलएलपी जैसी कंपनियों के साथ भी आरोपी ने समझौते किए और बाद में उन्हें धोखाधड़ी कर रद्द कर दिया। फिलहाल, पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है ताकि ठगी गई राशि की बरामदगी की जा सके और इस गिरोह के अन्य सदस्यों के ठिकानों का पता लगाया जा सके।